*ग्रामीण भारत न्यूज | जशपुरनगर*
*जशपुरनगर, 28 जुलाई 2026* – प्राकृतिक आपदा और नैसर्गिक विपत्तियों ने छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के 4 परिवारों की जिंदगी एक झटके में बदल दी। किसी का बेटा डेम के पानी में डूब गया, तो किसी की मां सांप के काटने से दुनिया छोड़ गई। किसी के घर का चिराग आकाशीय बिजली से बुझ गया, तो किसी की पत्नी तालाब में डूबने से इस दुनिया से चली गई।
इन हादसों से टूटे परिवारों के लिए अब छत्तीसगढ़ शासन ने मरहम लगाया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के नियमों के तहत जशपुर कलेक्टर *रोहित व्यास* ने 4 मृतकों के परिजनों को कुल *16 लाख रुपए* की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। हर पलाख रुपए दिए जाएंगे।
*राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत मिली राहत*
छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी *राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड-6 क्रमांक-4* में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि पर आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इसी नियम के तहत जशपुर जिले में हुई 4 अलग-अलग घटनाओं में मृतकों के निकटतम वारिसों को यह सहायता दी जा रही है।
अपर कलेक्टर *प्रदीप साहू* ने जानकारी देते हुए बताया कि यह राशि सीधे पात्र हितग्राहियों के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। प्रशासन ने सभी जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है और जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
*जानिए 4 मामले – कहां क्या हुआ*
*1. कुनकुरी का मामला: डेम में डूबने से गई बेटे की जान*
तहसील कुनकुरी के *ग्राम तुरी बस्ती* निवासी *संदीप राम पिता खोरहा राम* की 23 अक्टूबर 2025 को डेम के पानी में डूबने से मौत हो गई थी। संदीप अपने परिवार का सहारा थे। उनके जाने के बाद घर की जिम्मेदारी उनकी नाबालिग बेटी *स्नेहा* पर आ गई। शासन ने स्नेहा को मृतक की निकटतम वैध वारिस मानते हुए *4 लाख रुपए* की सहायता राशि स्वीकृत की है।
ग्रामीणों ने बताया कि संदीप मजदूरी कर परिवार पालते थे। हादसे के बाद से घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया था। अब मिली राशि से बेटी की पढ़ाई और भविष्य कुछ हद तक सुरक्षित हो सकेगा।
*2. पत्थलगांव का मामला: आकाशीय बिजली ने ली जान*
तहसील पत्थलगांव के *ग्राम कुनकुरी* निवासी *शिवचंद यादव पिता लच्छन यादव* की 16 जून 2025 को खेत में काम करते समय आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। शिवचंद के पीछे उनकी पत्नी *लालमुनी यादव* और छोटे बच्चे रह गए।
परिवार का एकमात्र कमाने वाला चला जाने से घर में आर्थिक तंगी आ गई। कलेक्टर ने लालमुनी यादव को *4 लाख रुपए* की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। पंचायत के सरपंच ने बताया कि बरसात के दिनों में बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
*3. बालाझर की घटना: तालाब में डूबने से महिला की मौत*
तहसील पत्थलगांव के ही *ग्राम बालाझर* में 18 अगस्त 2025 को *बिमला बाई पति बिहारी लाल* की तालाब के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। बिमला बाई घर के काम के साथ-साथ खेती में भी हाथ बटाती थीं।
उनके पति *बिहारी लाल* को अब अकेले परिवार चलाना है। प्रशासन ने बिहारी लाल को मृतिका का निकटतम वारिस मानते हुए *4 लाख रुपए* की सहायता राशि मंजूर की है। गांव में इस घटना के बाद तालाब के किनारे सुरक्षा के इंतजाम की मांग भी उठी है।
*4. फरसाबहार का दर्द: सांप के काटने से गई जान*
सबसे दर्दनाक घटना तहसील फरसाबहार के *ग्राम कोरंगामाल* में हुई। यहां 8 जून 2025 को *कपिल डनसेना पिता रांजो* को रात में सोते समय सांप ने काट लिया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
कपिल अविवाहित थे और अपनी बुजुर्ग मां *कौशल्या पति रांजो* के साथ रहते थे। बेटे के जाने के बाद बूढ़ी मां पूरी तरह बेसहारा हो गई। शासन ने कौशल्या को निकटतम वारिस मानते हुए *4 लाख रुपए* की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।
*कलेक्टर का बयान और प्रशासन की पहल*
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि “प्राकृतिक आपदा में किसी की जान नहीं लौटाई जा सकती, लेकिन शासन की कोशिश है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक रूप से संबल दिया जाए। सभी पात्र परिवारों को समय पर सहायता मिले, इसके लिए राजस्व अमले को निर्देश दिए गए हैं।”
उन्होंने यह भी अपील की कि बरसात के मौसम में डेम, नदी और तालाब के पास न जाएं। आकाशीय बिजली से बचाव के उपाय अपनाएं और सांप काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें।
*कैसे मिलती है आपदा सहायता? आवेदन की प्रक्रिया*
अगर आपके क्षेत्र में भी कोई प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होती है तो परिवार के सदस्य तुरंत तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए चाहिए:
1. *मृत्यु प्रमाण पत्र*
2. *पोस्टमार्टम रिपोर्ट* – यदि जरूरी हो
3. *वारिस प्रमाण पत्र*
4. *आधार कार्ड + बैंक पासबुक*
5. *घटना की पंचनामा रिपोर्ट*
सभी दस्तावेज जांच के बाद राजस्व विभाग 15-30 दिन में राशि स्वीकृत कर देता है। राशि सीधे हितग्राही के खाते में भेजी जाती है।
*ग्रामीणों में राहत की सांस*
इस सहायता से 4 परिवारों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। गांव के लोग प्रशासन के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। तुरी बस्ती की महिला समूह की प्रमुख ने कहा, “सरकार ने समय पर मदद की। अब स्नेहा की पढ़ाई रुकने नहीं पाएगी।”
वहीं कोरंगामाल में ग्रामीणों ने मांग की है कि सांप काटने की घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-वेनम इंजेक्शन की व्यवस्था पक्की की जाए।
*निष्कर्ष*
प्रकृति का कहर किसी को नहीं बख्शता। लेकिन ऐसे समय में सरकार का साथ ही परिवारों को फिर से खड़ा होने की ताकत देता है। जशपुर प्रशासन द्वारा 4 परिवारों को 16 लाख की सहायता इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
http://GRAMINBHARATNEWS.com पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और प्रशासन से उम्मीद करता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और ठोस कदम उठाए जाएं।
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*खबर स्रोत:* राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, जशपुर कलेक्टर कार्यालय
*रिपोर्ट:* ग्रामीण भारत न्यूज टीम, जशपुर
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