सारंगढ़ जिला के विकासखंड बरमकेला अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ में मे एक ऐसा किसान परिवार जो कयी सालों से बडे ही शौक से घोड़े पालते आ रहे हैं और घोड़ो को बच्चे की तरह देख भाल करते हैं व शौक से घुड़सवारी भी करते वे घोड़ो का ब्यवसाय नही करते हैं और न ही घोड़ो को किराये पर लगाते हैं बल्की बडे ही शौक से और प्यार से पालते हैं और घुड़सवारी करते है ये हैं ग्राम बिलाईगढ़ के विनायक राजहंस जो अभी पढ़ाई पिरियड पर हैं बहुत ही अच्छी तरह से घुड़सवारी कर लेतें हैं ठिक उसी तरह जिस तरह से इनके पिता डाक्टर झसकेतन राजहंस करते है अभी विनायक लगभग 17 वर्ष उम्र के ही होंगे और घुड़सवारी करने मे महारथ हासिल कर चुके हैं और प्रेक्टिस जारी है इस घुड़सवारी के कार्य मे इनके पिता ही गाईड करते हैं
आज के जमाने मे लोग मोटरसाईकिल और और कार की शौक करते है लेकिन यहा विनायक मोटरसाईकिल और कार के साथ घोड़े पालने और घुड़सवारी करने के बहुत ही शौकिन है सुबह और शाम मे रोड पर घोड़े पे सवार होकर दौड़ लगाते है अभीतक मोटरसाईकिल कि 95 की स्पीड घोड़े आगे ही रहता है लगातार प्रेक्टिस रहा तो घोड़ा और भी फास्ट दौड़ने में बहुत ही कामयाब रहेगा । आज के समय हम विनायक और उनके पिता के जज्बे सलाम करते हैं घोड़े को बडे ही शौक से पाल कर शौक से ही घुड़सवारी से अपना मनोरंजन व प्रेक्टिस को बनाये रखे है।



















